रूह कांप उठती है-एक-एक ईंट ज़ब साहेबजादे के श्वासों को रोक रही थी
Home रूह कांप उठती है-एक-एक ईंट ज़ब साहेबजादे के श्वासों को रोक रही थी जरा कल्पना करें, नन्हें-मुन्ने बालक जिंदा दीवार में चुनवायें जा रहे थे। एक-एक ईंट उनके श्वासों को रोकने के लिए लगाई जा रही थी। साहेबजादे केवल देश, धर्म की खातिर हंसते-हंसते, तिल-तिल करके अपना बलिदान दे रहे थे। रूह कांप उठती […]
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