श्री अटल बिहारी वाजपेयी- एक ऐसे राजनेता जिन्होंने राजनिति को राष्ट्रनिति के साथ जोडते हुए काम किया

वह राजनेता जिन्होने विभिन्न विचारों के राजनैतिक दलों, राजनेताओं के साथ मिल कर किस प्रकार राष्ट्रहित में सरकार चलाई जा सकती है इसका उदाहरण प्रस्तुत किया। . . .

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श्री अटल बिहारी वाजपेयी- एक ऐसे राजनेता जिन्होंने राजनिति को राष्ट्रनिति के साथ जोडते हुए काम किया

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‘‘छोटे मन से कोई बडा नहीं होता, टूटे मन से कोई खडा नहीं होता’’
श्रद्धेय स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपायी एक विलक्षण राजनेता थे
वह राजनेता जो राजनिति में रहते हुए भी राजनिति से निर्लिप्त रहे।

वह राजनेता जिन्होंने राजनिति को राष्ट्रनिति के साथ जोडते हुए काम किया।
वह राजनेता जिन्होने विभिन्न विचारों के राजनैतिक दलों, राजनेताओं के साथ मिल कर किस प्रकार राष्ट्रहित में सरकार चलाई जा सकती है इसका उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्रतिपक्ष में नेता का क्या व्यवहार होना चाहिए व देश हित के मुद्दों को किस प्रकार उठाना चाहिए व देश पर जब विपत्ती हो तो सत्ता के साथ चट्टान की तरह खडा होना चाहिए यह उदाहरण प्रस्तुत किए। 1971 के युद्ध में अपनी धुर राजनैतिक विरोधी श्रीमती इन्दिरा गांधी को रणचण्डी की संज्ञा देकर देश उनके साथ खडा है ऐसा विश्वास देने वाले अटल थे।
सत्ता में रहते हुए, भारत के दूर दराज तक विकास कैसे पहुंचे, आधार भूत ढांचे का विकास हो, गरीब का कल्याण हो, शिक्षा रोजगार देने वाली हो और भारत शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बने इस दिशा में उन्होंने काम किया।
भारत को परमाणू शक्ति सम्पन्न बनाना, कलाम साहब को देश का राष्ट्रपति बनाना, जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान के नारे को चरितार्थ करते हुए विश्व में अटल शक्ति के रूप में खडे रहे, ऐसे थे अटल जी।
देश के लोकतन्त्र को जब खतरा हो गया देश में श्रीमती इन्दिरा जी ने आपातकाल लगा दिया तो कोमल ह्रदय अटल जी ने जेलों की सलाखों के पीछे से ही इन्दिरा कांग्रेस की निरकुंश सत्ता को उखाड फैंका और लोकतन्त्र के हित में उन सभी दलों को साथ लिया जिनके साथ वैचारिक मत भेद थे और लोकतन्त्र की रक्षा की।
कवि ह्रदय अटल जी राष्ट्रहित के विषयों पर अत्यन्त कठोर थे, परमाणू परिक्षण के समय दुनिया भर के प्रतिबन्धों का दृढता से मुकाबला किया। कारगिल युद्ध में समझौता वार्ताओं को ठुकराते हुए सीमा पर सैनिकों के साथ खडे होकर दुशमन को परास्त किया, ऐसे थे अटल जी।
हिमाचल के साथ अत्यन्त प्रेम था अटल जी को और मनाली के प्रीणी में एक छोटा सा आशियाना बनाकर हर साल कुछ समय वहां पर व्यतीत करना उनके जीवन का हिस्सा था।
न शादी, न परिवार, भारत देश ही मेरा घर है व भारतवासी मेरा परिवार यह भाव लेकर सम्पूर्ण जीवन देश को समर्पित किया।

उन्होंने लिखाः-
अटल चुनौती अखिल विश्व को,
भला बुरा चाहे जो माने,
डटे हुए है राष्ट्र धर्म पर,
विपदाओं में सीना ताने,
लाख-लाख पीढियां पढी,
तब हमने यह संस्कृति उपजाई,
कोटी-कोटी सिर चढे तभी,
इसकी रक्षा सम्भव हो पाई,
हैं असंख्य तैयार स्वयं मिट,
इसका जीवन सफल बनाने,
डटे हुए है राष्ट्र धर्म पर,
विपदाओं में सीना ताने,
अटल चुनौती अखिल विश्व को।

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