सक्सेस स्टोरी: परकोलेशन वैल ने कैसे बदला लोगों का जीवन

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परकोलेशन वैल बदलने लगा है लोगों का जीवनः-

नाहन विधानसभा क्षेत्र के अनेकों इलाके ऐसे हैं जो नदी नालों से भरे पडे हैं इन नदी नालों में बरसात के मौसम में भारी पानी आता है। बाढ जैसे हालात होते है, खेत खलियान बहने लगते हैं परन्तु जैसे ही बरसातों का मौसम समाप्त होता है सभी नदी नालें सूख जाते है और आस-पास के ग्रामीण जन पेयजल के लिए भी महरूम हो जाते है।

वर्षों तक इन नदी नालों के आस-पास मैं घूमता रहा, भू-जल वैज्ञानिकों को स्थान-स्थान से ला कर सर्वेक्षण कराया गया, अनेक स्थानों पर टयूबवैल बोर कराए गए परन्तु नतीजा यह रहा की हर बोर में एक इंच पानी, दो इंच पानी वह पानी भी स्थाई नहीं।

मारकण्डा नदी व मारकण्डा नदी की सहायक नदियां जैसे रूण नदी, सलानी नदी, नीमवाली नदी, इन सभी में गहरा भू-जल प्राप्त नहीं हुआ, केवल तलहटी में आ कर काला-आम, खैरी, त्रिलोकपुर के कुछ इलाके व बाता नदी के क्षेत्र में ही टयूबवैल मे कामयाबी मिलती है। अर्थात् गहरे भूमिगत जल की मात्रा मारकण्डे नदी व उनकी सहायक नदियों के किनारे बहुत कम है।

इसके परिणाम् स्वरूप लगभग साठ-सत्तर हजार की आबादी का जीवन पेयजल की सुचारू आपूर्ति के बिना कष्ट में था।

लगातार वैज्ञानिकों की मदद लेने के बाद पाया कि इन क्षेत्रों में भूमिगत जल केवल 40 फुट की गइराई तक ही उपलब्ध है उसके नीचे पथरीली परते होने के कारण 100 फुट से 300 फुट तक जल की उपलब्धता कम रहती है।

अब सवाल आया की इस पेयजल का दोहन किस तरह किया जाए, तो प्रश्न आए कि पानी जहाॅ से लिया जाए वह बारह महीने मिलना चाहिए। क्योकि पानी 40 फुट के ऊपर का है उसे पीने योग्य किस प्रकार बनाया जाए यदि Filtration Bed (फिलटरेशन बेड) बनाते है तो मनुष्य द्वारा असावधानियां होने से अस्वच्छ पानी घरों में जा सकता है। इन सभी समस्याओं का समाधान ढूॅड कर निकाला गया परकोलेशन वैल।

ये परकोलेशन वैल क्या है:- एक ऐसा कूंआ जिसमें पानी छन कर जाए Percolate होकर जाए।

एक सफलतम् प्रयोग आई.पी.एच. विभाग नाहन को प्रेरणा देते हुए किया गया एक अद्वितीय प्रयोग है परकोलेशन वैल।

RCC- सिमेंट, कंकरीट का एक कूंआ जिसे नदी के किनारे एक ऐसे स्थान पर बनाया गया जहाॅ बारह महीने भूमि गत जल 20 से 40 फुट पर उपलब्ध है व 40 फुट के बाद जहाॅ पथरीली परतें शुरू हो गई है। ऐसा स्थान जहाॅ पर से क्षेत्र विशेष के लिए पानी उठाया जा सकता है। ये कूंआ सामान्य कूंआ नहीं है, न ही केवल सीमेंट कंकरीट का सामान्य कूंआ है।

इस कूंए में Filtration Wall’s बनाई गई है जो लगभग एक फुट मोटी कंकरीट की छलनी की तरह हैं जिनमें से छन कर पानी कूंए में स्टोर हो रहा है।

Percolation Well का साइज अनुमानता 6 मीटर x 6 मीटर अर्थात 6 मीटर गहरा, 6 मीटर चौड़ा जिसमें RCC Pillar खडे है व 1 मीटर x 1 मीटर की Filtration Wall Pillars के मध्य बनाई गई है। इस कूंए को शने-शने भूमि के नीचे उतारा गया और कूंए के चारों ओर Filter Media डाला गया और अब तैयार हो गया परकोलेशन वैल।

इस पर कंकरीट की छत डाल कर कूंए की सफाई का स्थान रखा गया और मोटर पम्प लगा कर स्वच्छ पेयजल इलाका वासियों तक पहुंचाया गया।

विशेषता जिस इलाके में टयूबवैल में 1 से 2 LPS पानी मिलना भी कठिन होता था वहाॅ पर एक-एक परकोलेशन वैल में 14 से 24 LPS पानी प्राप्त हुआ है।

लगातार ये वैल कामयाब होते जा रहे हैं। सात बडे Percolation Well Complete होने वाले है व 1-1 वैल पांच हजार की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने में सक्षम होगा।

विशेषः- गांव भी यहीं थे, पानी की आवश्यक्ता भी थी, नदी नाले भी थे, आई.पी.एच. विभाग भी था, सरकारें भी थी परन्तु यह प्रयोग नहीं हो पाया।

हमने गम्भीरता दिखाई, जिज्ञासा दिखाई, दौड भाग की, हिम्मत बंधाई, उसी आई.पी.एच. विभाग ने यह सफलता हासिल की। मार्ग दर्शन रहा श्री जोगेन्द्र चौहान Chief Engineer I&PH कार्य निषपादन किया Ex.EN I&PH श्री मनदीप गुप्ता, Ex.EN I&PH श्री अशीष राणा व उनकी टीम ने।

एक और सफल प्रयोग किया गया वह है Tuberlar Intake

बरसात के बाद सूख जाने वाले नालों में Tuberlar Intake लगाए गए। एक 20 से 30 फुट गहरा कच्चा कूंआ निर्मित किया गया, उस कूंए में 4 से 8 इंच मोटी G.I. पाईप को Perforate करके कूंए के तल पर बैठाया गया, फिर इन पाईपों के साथ एक और Perforated Pipe को Vertically खडा किया गया और निर्मित कच्चे कूंए को Filter Media से भर दिया गया, अब तैयार हो गया Tuberlar Intake.

Vertical Pipe में Submersible Pump डालकर छोटे गांव के लिए लगातार पानी प्राप्त हो रहा है।

कम लागत शानादार परिणाम्

विशेषः- जगह का चुनाव अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

 

-डॉ.राजीव बिंदल

 

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