‘‘प्रभु श्री राम के भक्त कार सेवकों पर गोलियां बरसीं ’’

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  हमने देखा, बडी मात्रा में पराली (चावल की घास) वहां डाली हुई थी। बस फिर क्या था, सभी थके मांदे कार सेवक उस पर लेट गए। ग्राम वासियों ने चूल्हे बना रखे थे। उस पर कद्दू की सब्जी चढा दी व रोटियाॅ बनने लगी। प्रातः 4 बजे सभी कार सेवको को उठाया गया, शौच इत्यादि से निवृत हो कर पत्तल में रोटी दी गई। भोजन कर रही रहे थे कि एक व्यक्ति साईकल पर दौडा हुआ आया। वह बहुत उत्साह के साथ हडबडाहट में था।

  वह बोला- ‘‘फतेह हो गई जीत लिया, गुम्मबज पर कार सेवक चढ गए मुलायम सिंह का किला तोड दिया गया।’’

  यह सुनकर गांव वासियो व कार सेवको मे बिजली सी दौड गई। सब ओर जय श्री राम, जय श्री राम की आवाजें गूजने लगीं। अब हम लोग व्याकुल हो चले थे, मन कर रहा था उड़ कर अयोध्या जी पहुॅच जाएं। सभी जल्दी-जल्दी अपनी थकावट भूल कर पिटठू उठाकर चल पडे, दो मार्ग दर्शक दण्ड लेकर साथ थे। देखते ही देखते प्रातः 9 बजे तक हम एक छावनी मे पहुॅच गए। सडकें, रास्ते सुनसान थे। अयोध्या नगरी मिल्ट्री, पुलिस पैरा मिल्ट्री से भरी पडी थी। हमें किसी चोर रास्ते से मन्दिर-मन्दिर होते हुए छावनी में पहुॅचाया गया।

  यहां पहुॅचते ही हमारे आश्चार्य की सीमा नही थी। लगभग 1 लाख लोग उस छावनी में विद्यामान थे। भजन कीर्तन सत्संग व जय श्री राम के उदघोष चल रहे थे। अब तो एक छोटा सा नाला सीधा समुद्र में शमिल हुआ प्रतीत हुआ। मानो हम सब उस विशाल समुद्र में कहीं खो गए थे। 

  यहां पहुंचकर मालूम पडा की पिछले दिन 1 लाख कार सेवकों ने श्री राम  जन्म स्थल की ओर कूच किया था। हजारों कार सेवक नाके तोडकर परिसर में दाखिल हो गए। चन्द कार सेवक गुम्बज पर चढ़ गए। देखते ही देखते पैरा मिल्ट्री ने उन्हे ढेर कर दिया। राम भक्तो पर गोलियाॅ बरसीं, आंसू गैस, लाठियो का कोई अन्त नही था। कितने बलिदान हुए इसका हिसाब आज तक नही लगा

  यह सब होने के बाद भी वहां मौजूद कार सेवको का रक्त खौल रहा था। सभी राम के नाम पर सर्वस्व न्यौछावर कर देना चाहते थे। जन्म भूमि आन्दोलन के नेताओं पर दबाव डाला जा रहा था कि दोबारा से जन्म स्थान की ओर कूच करना है। 30 नवम्बर 1990 को पहला मार्च हुआ था, जिसमें न जाने कितने राम भक्त शहीद हुए थे। दो दिसम्बर को दूसरा कूच तय हुआ। चार नेताओ के नेतृत्व में  चार रास्तों से कूच तय हुआ।

  जैसे ही जय श्री राम का उदघोष हुआ, शंख ध्वनि हुई और लाखो कार सेवक अयोध्या की सड़कों पर उतर गए। ऐसा लगा मानो टिड्डी दल आ गया हो। हर मन्दिर से, हर अखाडे से कई-कई किलोमीटर तक राम भक्तो का समुद्र दिख रहा था। देखते ही देखते जाम लग गया, भीड़ बढ़ गई, छाती से छाती जुड़ गई।

  अपने स्वभाव के कारण, मैं भीड़ को चीरता हुआ आगे बढ़ गया। क्या देखता हूं कि छोटी सडक जैसे ही रामगढ़ी वाली सडक पर मिली वहां गोलियां चल रही है। आंसू गैस के गोले गीली बोरी में लेपट कर उन्हे दबा रहे हैं। ताकि राम भक्तो को नुकसान न हो। ऐसा भयावह युद्व था। एक ओर राम भक्त निहत्थे, केवल राम का नाम लेकर आगे बढ रहे थे। दूसरी ओर से पुलिस, पैरा मिल्ट्री फायरिंग कर रही थी। कार सेवक गिरते जा रहे थे, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मुलायम सिंह 30 नवम्बर का बदला ले रहा हों।

  एक भी कार सेवक को मुख्यमार्ग पर बढने नही दिया जा रहा था। लगभग आधा घण्टा के बाद एक जोरदार धक्का पीछे से आया और हजारो कार सेवक मुख्यमार्ग पर बढ़ गए। इस प्रकार चारो ओर के जत्थे मुख्यमार्ग पर बढ गए। प्लास्टिक की गोलियों की बौछारें राम भक्तों को छलनी कर रही थी। लाठी चार्ज आंसू गैस के गोले सीधे राम भक्तो पर लग रहे थे। तभी आदेश हुआ, राम भक्तो पीछे हटो…!

-डा. राजीव बिन्दल

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