एस्ट्रोट्रफ मैदान माजरा-फिर से तैयार होंगे सीता-गीता गुसाईं जैसे हॉकी स्टार

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  रियासतकाल से नाहन का खेल फुटबाल रहा है। आम जनमानस इस खेल से हमेशा ही जुड़ा रहा। जब फुटबाल के मैच होते थे, उस समय हजारों लोग उस मैच का आनन्द लेते थे व अपने आपको फुटबाल के साथ जोडते थे।

  माजरा व पांवटा साहिब का खेल हॉकी रहा है। माजरा में हॉकी मैच के दौरान हजारों की भीड़ जुटती थी। जिसमें शारीरिक क्षमताओं का विकास, टीम भावना का विकास, सामूहिकता का अहसास, यह सब कुछ दिखाई देता था।

  माजरा के मैदान ने अनेकानेक राष्ट्रीय स्तर के साथ अंतराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले खिलाडी प्रदान किए हैं। इस प्रकार हॉकी सिरमौर का लोकप्रिय और पसंददीदा खेल बनकर उभरा।

  पर एक ऐसा वक्त आया, जब हर गांव में, गली मोहल्ले में, बच्चों ने क्रिकेट खेलना शुरू किया। टूटे-फूटे बैट, पत्थर की विकेट और लंबे समय का खेल, क्रिकेट की चकाचौंध ने शेष खेलों को जैसा दबा दिया। या फिर यूं कहें कि कुछ समय के लिए अप्रासांगिक सा बना दिया। वर्तमान के मोबाईल युग ने तो समाज का, युवाओं का तानाबाना ही बिखेर कर रख दिया। इससे शारीरिक क्षमताओं, मानसिक स्वास्थ्य और सामूहिकता के भाव, सभी पर आघात हुआ।

  हमारा मानना है कि हॉकी जैसे भारतीय मूल के खेल को बढावा देने में माजरा का यह एस्ट्रोट्रफ का मैदान बहुत बडी भूमिका निभाएगा। माजरा एक बार पुनः खेल जगत के राष्ट्रीय क्षितिज पर उभरेगा। साथ ही हमारे सिरमौर के युवाओं को नए अवसर प्राप्त होंगे।

  माजरा में एस्ट्रोट्रफ मैदान की स्वीकृति के लिए (5.50 करोड़) मैं समस्त हॉकी खिलाड़ियों और हॉकी खेल प्रेमियों युवाओं को अपनी ओर से बधाई देता हूं।

 मैं उम्मीद करता हूं नाहन की इंडियन हॉकी स्टार सीता-गीता गुंसाई की तरह हमारे नवोदित हॉकी खिलाड़ी इस एस्ट्रोट्रफ मैदान का उपयोग कर सिरमौर और हिमाचल का नाम रोशन करेंगे।

जय हिंद..! जय हिमाचल..!

-डॉ. राजीव बिन्दल

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