नाहन में आर्मी -सिविल भूमि सम्बन्धी मामले पर बनेगी हाई लेवल कमेटी
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आज हमने धर्मशाला के तपोवन में चले रहे शीतकालीन विधानसभा सत्र के अवसर पर नियम 62 के तहत नाहन में सेना और सिविल के बीच दशकों से चल रहे भूमि सम्बन्धी मामले को तथ्यों के साथ गंभीरतापूर्वक रखा है। हमने सदन में नाहन क्षेत्र में आर्मी के साथ चल रहे भूमि विवाद पर दशकों से पेश आ रही समस्याओं पर नागरिकों का पक्ष रखते हुए समस्या के समाधान के लिए सुझाव भी दिए।
प्रदेश सरकार की ओर से सदन में माननीय जल शक्ति मंत्री ठाकुर महेन्द्र सिंह ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता मे कमेटी गठित करने की बात सदन में कही।
आज शनिवार को सदन में रखे गए अपने वक्तव्य के प्रमुख अंश में निम्न प्रकार से आप सबके सामने रख रहा हूं:
डॉक्टर राजीव बिन्दल :
* माननीय अध्यक्ष महोदय आपका आभार, नाहन विधान सभा क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले सेना क्षेत्र के आस-पास बसे हुए नागरिकों की गंभीर समस्याओं से उत्पन्न स्थति की ओर मैंन माननीय जल शक्ति मंत्री महोदय का ध्यान आकर्षित करता हूं।
* माननीय अध्यक्ष जी नाहन विधान सभा क्षेत्र में लगभग 5000 ऐसे लोगों की आबादी है जो सेना क्षेत्र के कारण बहुत बुरी तरह से प्रभावित है। सेना का संपूर्ण सम्मान है और जो नाहन में सेना का कैंप है वह पैरा-1 का कैंप है और अत्यंत महत्वपूर्ण कैंप है।
* हमारे यहां श्री बिक्रम सिंह जरयाल जी वहीं से कंमाडो ट्रेनिंग ले करके सेना में भर्ती हुए और आज भी वह देश का एक बेहतरीन संस्थान है। उसके बावजूद यह समस्या लम्बे समय से नाहन विधान सभा क्षेत्र की बनी हुई है।
* माननीय अध्यक्ष जी मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहूंगा कि नाहन में महाराजाओं का राज था। उनकी अपनी सेना थी और जो उनकी सेना थी उस सेना का वह छावनी क्षेत्र हुआ करता था। जो सैनिक थे और जो पूर्व सैनिक थे उनको महाराजा ने अपनी ओर से स्थान दे रखा था।
* जब सिरमौर राज्य का विलय हिमाचल प्रदेश में और देश में हुए उस समय एक शब्द सरकार उसके अन्दर आया और सरकार के साथ सेना के साथ-साथ रेवेन्यू एंट्री की एक गलती से यह जो 5000 लोग है इनका जीवन कष्टमय हो गया। लोगों के अपने नाम जमीन है उनके बरामदे उनके नाम नहीं हैं।
* जिन रास्तों के ऊपर से वे चलते हैं वे रास्ते सेना के पास हैं और सेना उन रास्तों पर उपनी सुरक्षा की दृष्टि से आने-जाने में रुकावट पैदा करती है। उनकी अपनी जमीन के अंदर मकान बनाने में उन्हें अनुमति लेनी पड़ती है।
* जो सालों-साल, महीनों अनुमति नहीं मिलती है। उनको मकान की मरम्मत करवाने के लिए अनुमति लेने पड़ती है वह उन्हें नहीं मिलती है। वहां पर उनको पानी का नलका नगवाने के लिए सेना के माध्यम से अनुमति देनी पड़ती है। उन्हें बिजली का कनेक्शन लगाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है और इस गंभीर समस्या से वे निपट रहे हैं।
* माननीय अध्यक्ष जी यह समस्या नई नहीं है और इसमें ऐसा भी नहीं है कि पहले किसी ने प्रयास नहीं किया। मेरे पास एक पत्र है 1982 का है। उस समय के माननीय सांसद आदरणीय श्री के.डी. सुल्तानपुरी जी ने उस समय के रक्षा मंत्री जी को इस समस्या के समाधान के लिए एक पत्र लिखा था। पूर्व मुख्य मंत्री स्वर्गीय श्री वीरभद्र सिंह जी को भी अनेक प्रतिनिधि मण्डल इस समस्या के समाधान के लिए मिले थे।
* केन्द्र सरकार में रक्षा मंत्री रहे स्वर्गीय श्री अरुण जेटली जी के साथ हमारा एक दल अनेक बार मिला था। इसके अलावा स्वर्गीय श्री मनोहर पर्रीकर जी जब रक्षा मंत्री थे तब उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए बहुत बड़ी राहत का काम किया था।
* श्री अनुराग ठाकुर, तत्कालीन सांसद श्री वीरेन्द्र कश्यप, डॉ0 राजीव सैजल जोकि अभी प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हैं और मैं स्वयं विधान सभा अध्यक्ष के नाते श्री मनोहर पर्रीकर जी के साथ बैठे थे। उस समय एक बहुत बड़ी हाई लेवल बैठक हुई थी जिसके अंदर इसके क्रक्स का समाधान निकालने का प्रयास हुआ था।
* वर्तमान मुख्य मंत्री श्री जय राम ठाकुर जी ने वर्तमान केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी से मुलाकात करके इस समस्या का समाधान करने के लिए आगे पग बढ़ाया है। इतना ही नहीं माननीय मुख्य मंत्री श्री जय राम ठाकुर जी ने इस समस्या के समाधान के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव महोदय को और सामान्य प्रशासन के सचिव महोदय को आदेश भी दिए थे जिसके बाद उन्होंने इसमें अनेक कदम आगे बढ़ाए हैं।
क्रमशः
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