प्रभु श्री राम ने जब मुझे अयोध्या बुलाया : डॉ. बिंदल
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जब प्रभु श्री राम का आह्वान हुआ, तो पूरा देश “जय श्री राम” के उद्घोष से गूंज उठा। विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेतृत्व में देशव्यापी आंदोलन प्रारंभ हुआ। यह सिर्फ एक राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रश्न था।
जत्थों का प्रस्थान और संगठन
देशभर से कार सेवकों के जत्थे अयोध्या की ओर बढ़ने लगे। हिमाचल से भी अनेक समूह निकले। डॉ. राम कुमार बिंदल जैसे अग्रणी नेताओं के मार्गदर्शन में जत्थों का गठन हुआ। लेखक स्वयं 32 कार सेवकों के दल का नेतृत्व कर रहे थे, जिन्हें अलग-अलग ग्रुपों में संगठित किया गया।
लखनऊ तक का सफर और चुनौतियाँ
यात्रा कठिन थी। ट्रेनें बंद, बसें बंद, और हर ओर पुलिस का पहरा। कर्फ्यू जैसी स्थिति में भी कार सेवक अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। मंदिरों में शरण ली, छोटे-छोटे समूह बनाकर आगे बढ़े और हर बाधा का सामना किया।
अयोध्या पहुँचने का संघर्ष
लखनऊ से अयोध्या तक 200 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। लाखों कार सेवक सरयू नदी के पार रोके गए थे। 30 नवम्बर 1990 को जब लाखों राम भक्तों ने नारे लगाते हुए जन्मभूमि की ओर कूच किया, तो गोलियों और लाठियों की बौछार से अनगिनत बलिदान हुए। लेखक स्वयं उस भयानक गोलीकांड से बाल-बाल बचे।
जेल, मुक्ति और लौटने की पीड़ा
पुलिस ने कार सेवकों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया, बाद में स्टैम्प लगाकर उन्हें रिहा किया गया। बिना साधन और धन के वापसी भी किसी चुनौती से कम नहीं थी। लेकिन उस भयावह दृश्य की यादें वर्षों तक पीछा करती रहीं।
समापन: बलिदानों का परिणाम और श्री राम मंदिर
आज, 22 जनवरी 2024 का दिन उन लाखों बलिदानों की परिणति है। राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक सपना साकार हुआ। यह हर राम भक्त का परम सौभाग्य है कि अपने जीवनकाल में श्री राम मंदिर के दर्शन कर पा रहे हैं।






























































