‘‘राष्ट्रवादी राजनीति के तत्वचिंतक थे प.दीन दयाल उपाध्याय’’

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  आज श्रद्धेय पं.दीन दयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर, मैं उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूं…!!

  आज के इस ऐतिहासिक दिवस के अवसर पर, मैं संपूर्ण राष्ट्र के प्रेरणा स्रोत, पंडित दीन दयाल जी के श्रीचरणों में चंद शब्दों के माध्यम से अपने श्रद्धा सुमन भेंट करना चाहता हूं…!!

  पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी, राष्ट्र समर्पित महापुरूष के रूप में जनसंघ के लिए विचारक, प्रचारक, संगंठक एवं राजनैतिक योजनाकर चारों रूप में विद्यमान थे। अखंड  भारत का विचार, चिंतन ही उनका जीवन दर्शन था।

  उन्होंने कहा था-‘‘भारत का विभाजन उसकी अपनी मूल संस्कृति के विरूद्ध था….!’’

  ‘वास्तव में एक देश, एक राष्ट्र तथा एक संस्कृति के सिद्धांत पर जनसंघ को विश्वास था। पर कांग्रेस ने द्वि-राष्ट्रवाद के सिद्धांत के सामने घुटने टेक दिए, किन्तु जनसंघ ने मानसिक रूप से इसे कभी स्वीकार नहीं किया।’’

  जनसंघ अपने इस मूल सिद्धांत के साथ आज भी आगे बढ़ रहा है कि-‘‘एक ही राष्ट्र के दो भाग फिर से एक होंगे तथा अखंड भारत का निर्माण होगा।’’

  काश्मीर के विषय में, 29 जून, 1952 को जनसंघ ने कश्मीर दिवस मनाया। काश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और धारा 370 को निरस्त करना होगा, इसको देश भर में विषय बनाया। आज पंडित दीन दयाल उपाध्याय व डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्वपन साकार हुआ।

  असम के बारे में, 1961 में जनसंघ ने प्रस्ताव पारित करके असम में चली आ रही पाकिस्तान की घुसपैठ को राष्ट्रद्रोह का नाम दिया और देश भर में जनजागरण अभियान चलाया।

  पंडित दीन दयाल जी का चिंतन, समन्वय बैठाने का चिंतन रहा, व्यक्ति स्वातंत्रय और सामाजिक अनुशासन, आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय, विविधता में एकता यह सब इसमें समाहित रहा।

  सामाजिक सुव्यवस्था और राज्य विहीनता, विशेषज्ञता और समग्रता, भौतिक प्रगति और आध्यात्मिक उन्नति।

   स्वतंत्रता चाहिए पर स्वैच्छाचार नहीं,  अनुशासन चाहिए पर सांचाबंद अवस्था नहीं, प्रतिष्ठा चाहिए पर सुविधाओं की गठरी नहीं, एकता चाहिए-पर एक रूपता नहीं, प्रौद्योगिक प्रगति चाहिए पर मानवीय गुणों का लोप नहीं, रोजगार के बढ़ते अवसर चाहिए पर अव्यवस्था नहीं,  और इसी प्रकार निचले स्तर पर छोटी-छोटी योजनाएं और राष्ट्रीय स्तर पर वृहत योजनाएं।

  अन्तयोदय अर्थात अन्तिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का उत्थान एवं राष्ट्रवाद का सर्वागीण विकास।

  उक्त विचारों को पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी ने साधा एवं जनसंघ को कार्य पद्वति का हिस्सा बनाया।

  गांधी जी, लोहिया जी, दीनदयाल जी ये तीन अर्वाचीन यानि आधुनिक भारत के विचारक हुए।

  पंडित दीन दयाल जी का विचार आज भाजपा के रूप में बढता हुआ दिखाई देता है।

-डा. राजीव बिन्दल

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