तभी और केवल तब ही तुम हिन्दू कहलाने के अधिकारी हो...
Main Photo Section
Main Content Section
स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा-
तभी और केवल तब ही तुम हिन्दू कहलाने के अधिकारी हो, जब इस नाम को सुनते रगों में शक्ति की विद्युत-तरंग दौड़ जाये।
तभी और केवल तब ही तुम हिन्दू कहलाने के अधिकारी हो, जब इस नाम को धारण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह जिस देश का हो, चाहे वह तुम्हारी भाषा बोलता हो अथवा कोई अन्य, प्रथम मिलन में ही तुम्हारा सगे-से-सगा तथा प्रिय-से-प्रिय बन जाये।
तभी और केवल तब ही तुम हिन्दू कहलाने के अधिकारी हो, जब इस नाम को धारण करने वाले किसी भी व्यक्ति का दुःख-दर्द तुम्हारे ह्रदय को इस प्रकार व्याकुल कर दे, मानो तुम्हारा अपना पुत्र संकट में हो।
तभी और केवल तब ही तुम हिन्दू कहलाने के अधिकारी हो सकोगे, जब तुम उनके लिए सब कुछ सहने को तत्पर रहोगे। उन महान गुरू गोविन्द सिंह के समान, जिन्होंने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अपना रक्त बहाया, रणक्षेत्र में अपने लाड़ले बेटों को बलिदान होते देखा, पर जिनके लिए, उन्होंने अपना तथा अपने सगे-सम्बन्धियों का रक्त चढ़ाया, उनके ही द्वारा परितयक्त होकर वह घायल सिंह कार्यक्षेत्र से चुपचाप हट गया और दक्षिण में जाकर चिरनिद्रा में खो गया। किन्तु, जिन्होने कृतघ्नतापूर्वक उनका साथ छोड़ दिया था, उनके लिए अभिशाप का एक शब्द भी उस वीर के मुंह से न फूटा। यह है आदर्श उस महान गुरू का।
Gallery Section






























































