ओ वीर पुरूष…
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मत भूल, तेरा नारीत्व का आर्दश सीता, सावित्री और दमयंती है।
मत भूल कि तेरे उपास्यदेव देवाधिदेव सर्वस्वत्यागी, उमापति शंकर हैं।
मत भूल कि तेरा विवाह, तेरी धन-संपति, तेरा जीवन केवल विषय-सुख के हेतु नहीं है, केवल तेरे व्यक्तिगत सुखोपभोग के लिए नहीं है।
मत भूल कि तू माता के चरणों में बलि चढ़ने के लिए ही पैदा हुआ है। मत भूल कि समाज-व्यवस्था उस अनंत जगज्जननी महामाया की छायामात्र है।
ओ वीर पुरूष
साहस बटोर, निर्भीक बन और गर्व कर कि तू भारतवासी है। गर्व से घोषणा कर कि मैं भारतवासी हूं, प्रत्येक भारतवासी मेरा भाई है।
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