पिता जी झारखंड के गोइलकेरा आए और मुझे अपना आशीर्वाद दिया..!
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झारखंड में आदिवासी क्षेत्र में सेवा कार्य चल रहा था। इसी बीच मेरे पूज्य पिताजी स्व. वैद्य बालमुकन्द जी मेरे कार्य को देखने के लिए सोलन से चलकर गोइलकेरा पहुंचे। काम को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए। मुझे बैठाकर पूछा -अब और क्या कार्य आपको यहां करना है। हमें गरीब आदिवासी बच्चों का एक छात्रावास गोयलकेरा में शुरू करना है, ऐसा मैंने पिताजी से कहा।
पिता जी ने कहा-शुरू करो देरी किस बात की है। मुझे पूछा कि कितने बच्चों का छात्रावास शुरू करना है और क्या राशि व्यय होगी। मेरा उत्तर था कि 20 बच्चों का छात्रावास शुरू करेंगे और लगभग एक लाख रूपए प्रतिवर्ष व्यय होगा (1979 में एक लाख रूपए बहुत बड़ी राशि होती थी)।
पिताजी ने कहा कि तुम काम शुरू करो मैं सोलन जाते ही तुम्हें अपेक्षित धन भेज दूंगा और प्रयास रहेगा कि आपको हर साल यह धन मेरी ओर से आता रहे।
पिताजी के जाने के तुरन्त बाद मैंने छात्रावास की तैयारी शुरू कर दी और देखते ही देखते 20 बच्चों का सेवा केन्द्र खड़ा हो गया।
-डा. राजीव बिन्दल
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