प्रभु श्रीराम जी और भगवान बिरसा मुंडा जी के आशीर्वाद से आज यह छात्रावास 200 विद्यार्थियों का हो गया..!
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मेरे सोलन आने के बाद भी यह चिकित्सालय, छात्रावास व अन्य सेवा कार्य वनवासी कल्याण आश्रम के तत्वाधान में आज भी भी चल रहे हैं। सौभाग्य की बात यह है कि 1980 से लेकर 2001 तक निरन्तर उस छात्रावास का शत-प्रतिशत व्यय बिन्दल परिवार से जाता रहा।
6 महीने पहले से गोइलकेरा छात्रावास से फोन और व्ह्टसअप पर कुछ फोटोग्राफ्स आने शुरू हुए, जब छात्रावास में 200 बच्चों का छात्रावास भवन बनाने का कार्य शुरू हुआ। मालूम पड़ा कि गुजरात के एक दंपति ने यह पुण्य कार्य अपने हाथ में लिया और 200 गरीब आदिवासी बच्चों के छात्रावास भवन निर्माण कार्य को पूर्ण कर दिया।
कल्याण आश्रम में कार्य करने से मेरे जीवन की दिशा समाज सेवा की ओर मुड़ी और वो सेवा का भाव सदैव मन में बना रहता है।
कल्याण आश्रम के संस्थापक बाबा साहेब देश पांडे जी को नमन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघ चालक परम पूजनीय श्री माधव सदाशिवराम गोवलकर ‘‘गुरूजी’’ को वंदन करता हूँ जिनकी प्रेरणा से वनवासी कल्याण आश्रम प्रारंभ हुआ।
पूज्य पिताजी और माताजी के श्रीचरणों में कोटिशः नमन।
-डा. राजीव बिन्दल
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