शहीद कुलविंदर सिंह स्कूल गिरीनगर बंद, कांग्रेस सरकार के फैसले पर फूटा जन आक्रोश..

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यह स्कूल वर्ष 1959 से संचालित है। यह गिरिनगर के साथ-साथ पंचायत पड़दूनी और आसपास के पांच गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। पिछले कई दशकों से यह स्कूल क्षेत्र के लिए केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक विकास की धुरी रहा है।

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सिरमौर जिले के विधानसभा क्षेत्र नाहन के गिरिनगर में स्थित कारगिल शहीद कुलविंद्र सिंह के नाम से संचालित स्कूल को बंद करने के प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ भारी जनआक्रोश फूट पड़ा है।
मंगलवार को दर्जनों की संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इस रोष प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने किया।
प्रदर्शन के दौरान बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो जैसे नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों ने डीसी सिरमौर के माध्यम से राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर स्कूल बंद करने के आदेश को तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की है।

स्कूल को बंद करने का फैसला कारगिल शहीद का अपमान
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक स्कूल का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए शहीद हुए वीर जवान कुलविंद्र सिंह ने इसी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी। उन्हीं के सम्मान में स्कूल का नामकरण शहीद कुलविंद्र सिंह के नाम पर किया गया था। ऐसे में स्कूल को बंद करने का निर्णय न केवल छात्रों के साथ अन्याय है, बल्कि यह सीधे तौर पर शहीद का अपमान भी है, जिससे पूरे क्षेत्र की भावनाएं आहत हुई हैं।

1959 से संचालित है स्कूल, 5 गांवों की है जीवनरेखा
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यह स्कूल वर्ष 1959 से संचालित है। यह गिरिनगर के साथ-साथ पंचायत पड़दूनी और आसपास के पांच गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। पिछले कई दशकों से यह स्कूल क्षेत्र के लिए केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक विकास की धुरी रहा है। हजारों विद्यार्थी यहां से पढ़कर अपने जीवन में आगे बढ़े हैं, ऐसे में बिना किसी ठोस कारण के इसे बंद करना सरासर अनुचित है।

गरीब बच्चों की पढ़ाई छूटने का सता रहा डर
ग्रामीणों ने प्रशासन को अवगत करवाया कि इस क्षेत्र के अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यदि यह स्कूल बंद होता है, तो छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए दूरदराज के स्कूलों में जाना पड़ेगा। इससे न केवल उनकी पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, बल्कि कई गरीब बच्चों के स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआऊट) की नौबत भी आ सकती है।
बिंदल का सरकार पर हमला, कहा-जनहित से कट चुकी है सरकार
इस मौके पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि स्कूल को बंद करना कांग्रेस सरकार की जनविरोधी सोच को दर्शाता है। यह गरीब परिवारों के लिए शिक्षा का मुख्य आधार रहा है और इसे बंद करना सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बिंदल ने कहा कि वर्तमान सरकार जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर मनमाने फैसले ले रही है और जनहित से पूरी तरह कट चुकी है।

ग्रामीणों और भाजपा ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय ग्रामीण जगदीश चंद, हितेश कुमार, सीता राम, सोमचंद, तरसेम सिंह, सतपाल, रघुबीर सिंह, सुनीता देवी, चंपा देवी, नीता देवी, धनीराम, सुरेश कुमार, गुमान सिंह, दलेल सिंह, राजेंद्र सिंह, ऊषा देवी, सुषमा देवी, ममता देवी, संध्या देवी और तारा देवी सहित भारी संख्या में मौजूद लोगों ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है।
ग्रामीणों और डॉ. बिंदल ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने स्कूल को पूर्व की भांति नियमित रूप से संचालित करने और इसे बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया, तो भाजपा और स्थानीय जनता मिलकर इस आंदोलन को और भी उग्र व व्यापक रूप देगी।

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