घोर जंगलों के मध्य ‘‘हो’’ जनजातीय क्षेत्र का बहुत छोटा सा गांव जहां मुझे चिकित्सालय शुरू करने का आदेश हुआ...!
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दृष्टि पटल पर वो एक-एक दृश्य अंकित होता जा रहा है जब मैं सिंघभूम जिला के कदम डिहा नाम स्थान पर श्री मूरंग सिंह पूर्ति जी, पूर्व लोकसभा सांसद के घर पहुँचा। घोर जंगलों के मध्य ‘‘हो’’ जनजातीय क्षेत्र में स्थित ये बहुत छोटा सा गांव जहां मुझे चिकित्सालय शुरू करने का आदेश हुआ और साधारण से जीवन के साथ उस आदिवासी समाज को आत्मसात करते हुए सेवा प्रकल्प की शुरूआत हुई।
तब यह क्षेत्र झारखंड नहीं था अपितु दक्षिण बिहार का सरंडा का जंगल था जहां मेरा पहला सेवा कार्य प्रारंभ हुआ। न भाषा की जानकारी, न खान-पान का सामंजस्य परन्तु ये वनवासी बंधु भारत माता के पुत्र-पुत्रियां हैं जिनके दुख-दर्द सांझा करते हुए समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का महान लक्ष्य लेकर कार्य शुरू हुआ।
शनैः-शनैः कार्य विस्तार हुआ और कदम डिहा से आगे बढ़कर कुईड़ा में चिकित्सालय शुरू किया जो थोड़ा बड़ा स्थान था और तत्पश्चात गोयलकेरा में चिकित्सालय शुरू किया।
हरियाणा से मिली यजदी जावा मोटरसाईकिल पर आदिवासी क्षेत्रों में घूम-घूम कर चिकित्सा के माध्यम से सेवा की अलख जगाई और कल्याण आश्रम का कार्य आगे बढ़ने लगा।
-डॉ. राजीव बिंदल
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