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केंद्र सहायता के ठोस आंकड़े रखे, आपत्तिजनक भाषा पर जताया विरोध — भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने सर्वदलीय बैठक बीच में छोड़ी

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हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के बाद उत्पन्न वित्तीय स्थिति पर चर्चा के लिए होटल पीटरहॉफ, शिमला में आयोजित सर्वदलीय बैठक में भारतीय जनता पार्टी ने भाग लिया। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, विधायक रणधीर शर्मा, विनोद कुमार, बलबीर वर्मा, त्रिलोक जम्वाल तथा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा उपस्थित रहे। बैठक में भाजपा ने प्रदेश के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए अपना तथ्यात्मक और विस्तृत पक्ष रखा।
बैठक में बोलते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का विकास सभी दलों की साझा जिम्मेदारी है और भाजपा ने सत्ता में रहते हुए तथा विपक्ष में रहते हुए हमेशा प्रदेश हित को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए लगभग 40 महीने हो चुके हैं और पूर्ण बहुमत होने के बावजूद अपनी वित्तीय विफलताओं का ठीकरा केंद्र सरकार और भाजपा पर फोड़ना एक योजनाबद्ध राजनीतिक प्रयास है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होना कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि पूर्व वित्त आयोगों — 14वें और 15वें वित्त आयोग — की सिफारिशों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित था कि यह अनुदान चरणबद्ध रूप से कम होगा और निर्धारित अवधि के बाद समाप्त होगा। ऐसे में इसे नई आपदा के रूप में प्रस्तुत कर जनता को भ्रमित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब यह तथ्य वर्षों से ज्ञात था, तो प्रदेश सरकार को समय रहते वैकल्पिक संसाधन सृजन, व्यय नियंत्रण और राजस्व वृद्धि की नीति पर काम करना चाहिए था।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बैठक में केंद्र से प्राप्त वित्तीय सहायता के विस्तृत आंकड़े रखते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न मदों में हिमाचल प्रदेश को बड़ी मात्रा में धनराशि उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022–23 में लगभग ₹50,000 करोड़, वर्ष 2023–24 में लगभग ₹43,000 करोड़ तथा वर्ष 2024–25/2025–26 में लगभग ₹35,000 करोड़ से अधिक राशि अलग-अलग केंद्रीय योजनाओं, टैक्स डिवोल्यूशन, केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (CSS), विश्व बैंक, नाबार्ड, पीएमजीएसवाई और अन्य अवसंरचना मदों के माध्यम से प्रदेश को प्राप्त हुई।
उन्होंने कहा कि केवल नेशनल हाईवे क्षेत्र में ही हिमाचल प्रदेश में लगभग ₹44,000 करोड़ से अधिक लागत की परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है, जो पूर्व कांग्रेस काल की तुलना में कई गुना अधिक है। रेलवे विस्तार के लिए जहां पहले बहुत सीमित राशि मिलती थी, वहीं अब हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट स्वीकृत और क्रियान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरंगों, फोरलेन, पुलों और ऑल-वेदर कनेक्टिविटी परियोजनाओं ने हिमाचल के इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य को बदला है।
डॉ. बिंदल ने औद्योगिक विकास के मुद्दे पर भी कांग्रेस नेताओं के बयानों का खंडन करते हुए कहा कि हिमाचल में उद्योगों की मजबूत आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिए गए औद्योगिक पैकेज से रखी गई थी। बाद में उस पैकेज को समाप्त करने और पुनर्स्थापित करने का इतिहास भी सार्वजनिक है। उन्होंने कहा कि आज बल्क ड्रग पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा दिए गए हैं, जिनकी निरंतर आलोचना करना प्रदेश के औद्योगिक भविष्य के साथ अन्याय है।
उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स डिवोल्यूशन में निरंतर वृद्धि हो रही है और आने वाले वर्षों में भी इसमें और बढ़ोतरी का प्रावधान है। जीएसटी कलेक्शन और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के माध्यम से राज्यों को अधिक संसाधन मिल रहे हैं। इसे नजरअंदाज कर केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाना तथ्यों के विपरीत है।
बैठक के दौरान भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि कुछ वक्ताओं द्वारा केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के संदर्भ में अनुचित और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। भाजपा ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा और संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है। इसी विषय पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने बैठक बीच में ही छोड़ दी।
भाजपा ने कहा कि वह प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए हर रचनात्मक चर्चा में भाग लेने को तैयार है, परंतु एकतरफा दोषारोपण, भ्रामक प्रस्तुति और राजनीतिक नैरेटिव गढ़कर वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाना समाधान नहीं है। पार्टी ने दोहराया कि प्रदेश हित से जुड़े हर विषय पर भाजपा मजबूती से अपनी बात रखती रहेगी और जनहित के मुद्दों को उठाती रहेगी।

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