‘‘विधानसभा अध्यक्ष-डा. राजीव बिंदल-एक परिचय’’
चरैवेति…! चरैवेति…! अर्थात निरंतर चलते रहो…! राष्टीय स्वयं सेवक संघ के इस मूल मंत्र के साथ डा. राजीव बिंदल जीवन में आगे बढ़ते रहे। अपने संगठनात्मक कौशल, कुशल व्यवहार और प्रबंधन के लिए मशहूर डा. बिंदल आज भाजपा संगठन, पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रदेश के लोगों के बीच अत्यंत लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित चेहरा हैं।
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चरैवेति…! चरैवेति…! अर्थात निरंतर चलते रहो…! राष्टीय स्वयं सेवक संघ के इस मूल मंत्र के साथ डा. राजीव बिंदल जीवन में आगे बढ़ते रहे। अपने संगठनात्मक कौशल, कुशल व्यवहार और प्रबंधन के लिए मशहूर डा. बिंदल आज भाजपा संगठन, पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रदेश के लोगों के बीच अत्यंत लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित चेहरा हैं।
उत्तर भारत के जाने माने जाने–माने वैद्य, समाज सेवी एवं आयुर्वेदाचार्य श्री बाल मुकन्द के घर, सोलन में 12 जनवरी 1955 को डा. राजीव बिंदल का जन्म हुआ था।
श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को अपना आदर्श मानने वाले डा. बिंदल का जीवन समाज सेवा, संघर्ष और सफलता की एक अनूठी मिसाल है। छात्र जीवन से ही राष्टीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से आगे बढ़ने वाले डा. बिंदल ने अपने शुरूआती जीवन में ही तय कर लिया था कि वह अपना संपूर्ण जीवन राष्ट और समाज सेवा में अर्पित करेंगे।
डा. बिंदल ने सन् 1978 में जी.ए.एम.एस. (आयुर्वेदाचार्य) की डिग्री हासिल करने के बाद संघ की प्ररेणा से झारखंड की ‘हो’ जनजाति के बीच ढाई वर्ष तक निष्काम सेवा भाव से कार्य किया।
श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा देश में 1975 में लगाए गए आपात काल के विरोध के कारण डा. बिंदल को हरियाणा की करनाल जेल में साढ़े चार माह तक कारावास काटना पड़ा।
डा. बिंदल ने सन् 1983 में अपने पैतृृक शहर सोलन में सेवा भाव से चिकित्सा कार्य शुरू किया और वर्ष 1995 में राजनीतिक जीवन में कदम रखते हुए सोलन नगर परिषद का चुनाव लड़ा और नगर परिषद अध्यक्ष बने।
डा. बिंदल ने सन् 2000 में सोलन से पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत हासिल की। उसके उपरांत वह वर्ष 2003 और 2007 में सोलन विधानसभा क्षेत्र सेः विधायक चुने गए। वर्ष 2007 में प्रदेश में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के पद पर आसीन हुए। डा. बिंदल की दूरदृष्टि के परिणामस्वरूप ही हिमाचल में 108 अटल स्वास्थ्य एंबुलेंस सेवा भी आरम्भ हुई।
डा. बिंदल ने सन् 2012 में सोलन विधानसभा क्षेत्र आरक्षित होने के फलस्वरूप नाहन विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विजयी हुए। इसके पश्चात उन्होंने वर्ष 2017 में पुनः नाहन से चुनाव लड़ा और फिर विजयश्री हासिल की।
नाहन क्षेत्र से विधायक चुनने के बाद कांग्रेस सरकार और कांग्रेस नेताओं ने हर कदम पर डा. बिंदल के मार्ग में रोड़े अटकाए किन्तु डा. बिंदल ने हार नहीं मानी। उन्होंने ज्वलंत जन समस्याओं के लिए नाहन के बड़ा चौक में 3 दिनों तक अनशन किया।
डा. बिंदल सरकार और पार्टी स्तर पर विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर आगे बढ़ते हुए आज विधानसभा अध्यक्ष जैसे अति महत्वपूर्ण पद पर आसीन हुए हैं।
विधानसभा अध्यक्ष के गरिमामय पद पर आसीन होने पर नाहन विधानसभा क्षेत्र, जिला सिरमौर एवं हिमाचल की जनता अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हुए डा. बिंदल को बधाई देती है।































































