भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा हमारी सनातन संस्कृति, आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक : डॉ. राजीव बिंदल

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  भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने आज ऐतिहासिक शहर नाहन में भगवान श्री जगन्नाथ जी की 18वीं भव्य रथ यात्रा के शुभ अवसर पर श्री जगन्नाथ शक्तिपीठ में आयोजित पूजा-अर्चना, हवन एवं यज्ञ में भाग लेकर भगवान श्री जगन्नाथ जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
  डॉ. बिंदल ने इस अवसर पर समस्त नाहन एवं हिमाचल प्रदेश के नागरिकों के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य तथा प्रदेश की निरंतर उन्नति के लिए विशेष प्रार्थना की।
  डॉ. बिंदल ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा भारतीय सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारा, सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला महापर्व है।
  उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक शहर नाहन में स्थित भगवान श्री जगन्नाथ जी का प्राचीन मंदिर सेंकड़ों वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र रहा है। यहां भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा की नियमित पूजा-अर्चना होती है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
  नाहन की यह रथ यात्रा समय के साथ एक विशाल धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन के रूप में स्थापित हुई है, जिसमें प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालु उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लेते हैं।
  डॉ. बिंदल ने कहा कि आज पूरा नाहन भगवान श्री जगन्नाथ जी की भक्ति में सराबोर दिखाई दिया। नगर में श्रद्धालुओं का उत्साह, भजन-कीर्तन, जयघोष और धार्मिक वातावरण अत्यंत प्रेरणादायक रहा। रथ यात्रा के मार्ग पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संगठनों द्वारा अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए भंडारों, शीतल पेयजल तथा प्रसाद वितरण की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि यह सेवा भावना हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है और समाज में पारस्परिक सहयोग एवं सद्भाव को सुदृढ़ करती है।
  उन्होंने भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा मण्डल के अध्यक्ष श्री प्रकाश बंसल, मण्डल के सभी पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों एवं श्रद्धालुओं को इस भव्य, अनुशासित और सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी।
  उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने तथा धार्मिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  डॉ. बिंदल ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति सदैव ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को लेकर आगे बढ़ी है और ऐसे धार्मिक आयोजन उसी आदर्श को साकार करते हैं।
  इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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